संदेश

"एक वक्त था”

  एक   वक़्त   था ! जब   मेरी   ख़्वाहिशों    की   कतार   बहुत   लंबी   थी ! जब   मुझे   तुम   भी   चाहिए   थी   और   तुमसे   जुड़े   हर   एक   हक़   भी ! एक   वक़्त   था ! जब   मैं   हर   रोज   सपनों   में   जिया   करता   था ! जब   मेरी   हर   सुबह   तुमसे   होती   थी , और   शाम   तुमपे   ख़त्म ! एक   वक़्त   था , मैं   बदतमीज़   था   काफी , मुझे   समझ   नहीं   थी   हर   उस   चीज़   की   जो   मेरे   पास   थी ! तुम   भी   थे   उसमें   से   एक ! तुम्हारा   होना   जैसे   मेरे   लिए   एक   आदत   सी   थी ! जैसे   जीवन   के   लिए   साँस , गीत   को   आवाज़ , दिन   को   रात , तुम   कुछ   ऐसे   ही ...

अधूरापन

अधूरापन  वैसे तो हम दोनो की जिंदगी धीरे धीरे पूरी हो रही है,,,लेकिन बहुत कुछ अधूरा रह गया हम दोनों के बीच में।। हमारी बातें अधूरी रह गई,,कभी पूरी न हो सकी क्योंकि तुम हमेशा बात पूरी होने से पहले ही सो जाया करती थी फिर वो बात अधूरी रह जाती थी,, हमारी लाइफ में बहुत अधूरापन,, कुछ भी पूरा ना हो सका,, न हमारा प्यार ,,ना हमारे सपने,, ना वो ख्वाब जो हम दोनो ने मिल कर देखे थे,,, कितने हसीन लगते थे तब ये ख्वाब जब दोनो साथ मिल कर बुन रहे थे,,वो बर्फीली वादियों में अपना घर बनाने का सपना ,, उन वादियों में अपना जहां बसाने का सपना,,, कितना हसीन वक्त था कि तब ख्वाब तो साथ देखते थे लेकिन आज तो अकेले भी ख्वाब ना आते है आती तो तुम्हारे साथ बिताए गए वक्त की यादें,, वो भी अधूरी ही आती है एक अधूरापन लेकर।।। हमारे अधूरे हो रह गए वादों को याद दिलाती है जो रह गए अधूरे ही,, कैसे भूल  जाऊं इन राहों को जिन राहों पर हम साथ घुमा करते थे कैसे भूल जाऊं लम्हों को जो हम साथ बिताया करते थे,, सब अधूरे ही रह गए,, एक अधूरापन छोड़ कर खो गए।। वो लम्हे तो लौट कर नहीं आते है लेकिन उन लम्हों का वो  अधूरापन रह गया...

“वादें”

वादें ... याद है ना….. मैंने भी तुम्हारे सीने पर सर रख और हाथों में हाथ थाम खुले आसमानों के नीचे तुम्हारी खुली छत पर ना जाने कितने वादे किए थे तुमसे ...तुमने हर वादे के बदले हमेशा ही मुझे दिया था एक निश्चिंत मौन ...उस मौन का अर्थ आज तक समझ नहीं आया मुझे.... वादें.... खट्टे मीठे वादें .., हमेशा स्माइल करने का वादा,एक दूसरे से रूठकर कुछ ही मिनटों मान जाने का वादा , उम्रभर साथ रहने का वादा, शहर से दूर कहीं किसी कोने में अपना आशियाना बनाने का वादा ..खुद में डूबकर मुझे पा लेने का वादा ...शादी के बाद अपने घर से जल्दी लौटने का वादा ...हमेशा ही हाथ थामे रखने का वादा ..सीने से लगे रहने देने का वादा ...उफ्फ... कितना अजीब है ना बिना गारन्टी के ज़िन्दगी को किसी के पास गिरवी रख देना... और उस सख़्स का उसे खो देना । मैंने भी तो यही किया था ..गिरवी रखा था खुद को .....अपनी ख्वाहिशों को , ख्वाबों को ..सिर्फ और सिर्फ इन्हीं वादों के बदले  आज उन वादों का बोझ महसूस हो रहा है मुझे.. इनका वजन इतना है कि मैं इनके बोझ से दबा जा रहा हूँ । अब इन्हें उम्रभर ढोना है मुझे ....उम्रभर... अकेले ...। मुझे रह रहकर सं...

अनकही बातें -1

मेरी फोन गैलेरी के एक अनचाहे फोल्डर में कुछ पुरानी तस्वीरे है तुम्हारी...जिनसे हर रोज़ बातें करता हूं मैं.... जब सैड सांग्स मेरे दिल मे कसक नही जगा पाते तब तुम्हारी कॉल रिकॉर्डिंग्स सुन लेता हूं...तुम्हारा नम्बर जिसपर ना जाने कितने महीनों से बात नही हुई, हर रोज़ उसे एक बार डायल करने की कोशिश जरूर करता हूं लेकिन कॉल डिटेल्स देखकर वापस आ जाता हूँ और कोसता हूं खुद को कि मैं अभी तक इसे भूला क्यों नही...जब किसी की तरफ दिल ज़रा सा झुका जाता है तो तुम्हारी आखिरी चैट और मैसेजेस पढ़ लेता हूं ये मुझे एहसास दिलाते है कि किसी से मोहब्बत क्यों नही करनी चाहिये...तुम्हारे शहर का नाम सुनते ही याद आ जाते हैं मुझे वो सारे ख्वाब जो उसी शहर की किसी ट्रेन के नीचे कुचल कर दम तोड़ चुके है... अब व्हाट्सअप का लास्ट सीन हाईड करके नही रखता मैं क्योंकि तुम्हारे दिए जख्मो को छुपाने के सिवा अब छुपाने को कुछ नही है मेरे पास... वो पल जब दशहरे के करीब आँगन में बारिश में तुम्हारा भीगना उस समय दुनिया की सबसे सुंदर लड़की लग रही थी तुम, तुम्हारी वो हरे रंग की टी शर्ट और उस पर काले रंग की स्कर्ट ,और उस पर सोने से सुहागा तुम्हारे...

कोई ख़ास

कोई ख़ास लोग सही ही कहते हैं कि ज़िंदगी जीना इतना भी आसान नही होता है अब कभी कभी लगता है कि सही ही कहा होगा किसी ने  जैसे तैसे ज़िंदगी ट्रैक पर आने लगती है तो कोई ना कोई ट्विस्ट आ ही जाता है  तुम कब आए और कब चले गये ये तो पलकें गिरने और उठने से भी जल्दी था  ख़ैर आज लगा की कोई किसी के लिए इतनी जल्दी कैसे ख़ास हो जाता है  पता है इश्क़ की सबसे खूबसूरत क्वालिटी क्या होती है  ये हो भी जाता है पता ही नही चलता… अब पता नही अपने इन एहसासों को प्यार का नाम दूँ या ना दूँ लेकिन हाँ शायद ये एहसास सबसे तो नही हो सकते ना फिरहाल कभी कभी मुझे लगता है कि  इश्क सबसे खूबसूरत तब होता है जब दो दिलों को कोई पसंद आने लगता है…एक लब्ज के सुनने पर जो मुस्कान होठों पे आती है "बबुवा" जो चमक आंखों में नजर आती है जैसे करोड़ी बिजलियां दौड़ने लगी हो आंखो में।।  जैसे एक हल्की आहट से तितली उड़ जाती है वैसे ही इश्क की शुरुवात भी हल्की सी आहट पे खिल जाती है।। मैं कैसे लिखूं इश्क के इस अहसास को जब दो दिलों में आहट होती है प्रेमी के दिल में एक अजब सी चंचलता होती है मन में,, लबों से निकले एक...

आंखों के मोती

तुमको पता है ना अब मैं रोता नहीं हूँ बस कभी कभी कुछ गाने सुनकर याद आ जाते हो तुम,फिर आंखें नशे में डूबकर सारी बातें खंगोल देती है,फिर पता नहीं कैसे छोटी छोटी बूंदें आंखों से झांक रही होती हैं मैं कहानियाँ सोच रहा होता हूँ  पता नहीं सारी कहानियों में तुम्हारे जैसे एक लड़की आ जाती है ,मुस्कुराता हूँ उसे देखकर कुछ लिख भी लिख लेता हूँ ,लेकिन खत्म होने के बाद उस कहानी के एक खामोशी सी रह जाती है लेकिन मैं अब रोता नहीं हूँ कुछ गाने हैं जो मुझे बेहद पसंद है  और क्यों पसंद है इसका जवाब शायद मुझे नहीं पता,बस जब सुनता हूँ उन्हें तो तुम्हे महसूस करने के बहाने ढूंढता हूँ,मुझे पता है जब तुम ये पढोगे तो तुम गानों के नाम जानना चाहोगे लेकिन माफ करना अभी से ही पता नहीं सकता पता है तुमको मजबूर हो जाती हैआंखे खुद से भर के आंसू इतने सारे फिर कुछ कह नहीं पाती मुझसे,और फिर कुछ बूंदे झांक रही होती है इन आँखों से मुझे नहीं पता हमारा ये रिश्ता सही था या नहीं लेकिन हां बस जितना आज कहा था ना उन कही बातों को याद रखना दिल से निकला हर लफ्ज़ एक दम सच है बाकी अभी क्या क्या कहूँ तुम्हारे बारे में,अपने प्यार के ब...

अधूरे से थोड़ा ज्यादा इश्क़

अधूरे से थोड़ा ज़्यादा इश्क़  सुनो, आज मेरे पास कहने के लिये आज भी कुछ नही है बस इसी बात पर हमेशा या रोज ही कहिये हमारी आपस मे थोड़ा-बहुत बहस व झगड़ा भी हो जाया करता था थोड़ा-बहुत नही उससे भी ज्यादा ।  मेरे जीवन में तुम पहली थी शायद आखिरी भी क्यो कि जो लम्हा हमने बिताये उसमे जिम्मेदारी,वफादारी,परवाह फिर कही जाकर स्नेह व प्रेम था जो भी था अटूट था,अभिन्न था,अतुलनीय था अकल्पनीय था । बिन बारात के तुम मेरी पत्नी बन गयी बिना सेहरा के मै तुम्हारा हमसफर,बिना डेट के हम दोनो डिनर भी गये ,बिना गाड़ी के हम दोनो लांग ड्राईव पर गये,तुम माँ भी बन गयी,तुमने कल्पना में मेरे बच्चो को भी पाले, तुम बुढ़ी भी हो गयी सब कुछ महसूस भी किया बातो बातो में,बात प्रेम की है तो उसे भी जान लो आजकल के आधुनिक शाहजहां, लैला-मजनू, हीर-रांझा की तरह नही जीवन संगिनी से भी बढ़कर थोड़ा सजावट भरे शब्दो मे कहे तो महादेव जी की पार्वती जी के भांति अर्धांगिनी के भाँति अंश भर ही सही अपने जीवन में दोनो ने एक दूसरे को स्थान दिया। आज कल के आशिको को शायद ही पता होगा या ऐसा महसूस होता भी है कि नही लेकिन हाँ मैने तुम्हे बिना साक...