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कोई ख़ास

कोई ख़ास लोग सही ही कहते हैं कि ज़िंदगी जीना इतना भी आसान नही होता है अब कभी कभी लगता है कि सही ही कहा होगा किसी ने  जैसे तैसे ज़िंदगी ट्रैक पर आने लगती है तो कोई ना कोई ट्विस्ट आ ही जाता है  तुम कब आए और कब चले गये ये तो पलकें गिरने और उठने से भी जल्दी था  ख़ैर आज लगा की कोई किसी के लिए इतनी जल्दी कैसे ख़ास हो जाता है  पता है इश्क़ की सबसे खूबसूरत क्वालिटी क्या होती है  ये हो भी जाता है पता ही नही चलता… अब पता नही अपने इन एहसासों को प्यार का नाम दूँ या ना दूँ लेकिन हाँ शायद ये एहसास सबसे तो नही हो सकते ना फिरहाल कभी कभी मुझे लगता है कि  इश्क सबसे खूबसूरत तब होता है जब दो दिलों को कोई पसंद आने लगता है…एक लब्ज के सुनने पर जो मुस्कान होठों पे आती है "बबुवा" जो चमक आंखों में नजर आती है जैसे करोड़ी बिजलियां दौड़ने लगी हो आंखो में।।  जैसे एक हल्की आहट से तितली उड़ जाती है वैसे ही इश्क की शुरुवात भी हल्की सी आहट पे खिल जाती है।। मैं कैसे लिखूं इश्क के इस अहसास को जब दो दिलों में आहट होती है प्रेमी के दिल में एक अजब सी चंचलता होती है मन में,, लबों से निकले एक...

आंखों के मोती

तुमको पता है ना अब मैं रोता नहीं हूँ बस कभी कभी कुछ गाने सुनकर याद आ जाते हो तुम,फिर आंखें नशे में डूबकर सारी बातें खंगोल देती है,फिर पता नहीं कैसे छोटी छोटी बूंदें आंखों से झांक रही होती हैं मैं कहानियाँ सोच रहा होता हूँ  पता नहीं सारी कहानियों में तुम्हारे जैसे एक लड़की आ जाती है ,मुस्कुराता हूँ उसे देखकर कुछ लिख भी लिख लेता हूँ ,लेकिन खत्म होने के बाद उस कहानी के एक खामोशी सी रह जाती है लेकिन मैं अब रोता नहीं हूँ कुछ गाने हैं जो मुझे बेहद पसंद है  और क्यों पसंद है इसका जवाब शायद मुझे नहीं पता,बस जब सुनता हूँ उन्हें तो तुम्हे महसूस करने के बहाने ढूंढता हूँ,मुझे पता है जब तुम ये पढोगे तो तुम गानों के नाम जानना चाहोगे लेकिन माफ करना अभी से ही पता नहीं सकता पता है तुमको मजबूर हो जाती हैआंखे खुद से भर के आंसू इतने सारे फिर कुछ कह नहीं पाती मुझसे,और फिर कुछ बूंदे झांक रही होती है इन आँखों से मुझे नहीं पता हमारा ये रिश्ता सही था या नहीं लेकिन हां बस जितना आज कहा था ना उन कही बातों को याद रखना दिल से निकला हर लफ्ज़ एक दम सच है बाकी अभी क्या क्या कहूँ तुम्हारे बारे में,अपने प्यार के ब...

अधूरे से थोड़ा ज्यादा इश्क़

अधूरे से थोड़ा ज़्यादा इश्क़  सुनो, आज मेरे पास कहने के लिये आज भी कुछ नही है बस इसी बात पर हमेशा या रोज ही कहिये हमारी आपस मे थोड़ा-बहुत बहस व झगड़ा भी हो जाया करता था थोड़ा-बहुत नही उससे भी ज्यादा ।  मेरे जीवन में तुम पहली थी शायद आखिरी भी क्यो कि जो लम्हा हमने बिताये उसमे जिम्मेदारी,वफादारी,परवाह फिर कही जाकर स्नेह व प्रेम था जो भी था अटूट था,अभिन्न था,अतुलनीय था अकल्पनीय था । बिन बारात के तुम मेरी पत्नी बन गयी बिना सेहरा के मै तुम्हारा हमसफर,बिना डेट के हम दोनो डिनर भी गये ,बिना गाड़ी के हम दोनो लांग ड्राईव पर गये,तुम माँ भी बन गयी,तुमने कल्पना में मेरे बच्चो को भी पाले, तुम बुढ़ी भी हो गयी सब कुछ महसूस भी किया बातो बातो में,बात प्रेम की है तो उसे भी जान लो आजकल के आधुनिक शाहजहां, लैला-मजनू, हीर-रांझा की तरह नही जीवन संगिनी से भी बढ़कर थोड़ा सजावट भरे शब्दो मे कहे तो महादेव जी की पार्वती जी के भांति अर्धांगिनी के भाँति अंश भर ही सही अपने जीवन में दोनो ने एक दूसरे को स्थान दिया। आज कल के आशिको को शायद ही पता होगा या ऐसा महसूस होता भी है कि नही लेकिन हाँ मैने तुम्हे बिना साक...

प्रेम और हम लड़के ❤️

प्रेम और हम लड़के ❤ वैसे तो किसी लिंग विशेष से जोडकर नही देखना होता है प्रेम को परन्तु फिर भी सार्वजनिक जीवन मे एक भ्रांति है की लड़के ईतना कुछ महसूस नही करते है या उन्हें प्रेम के मायनो मे सिर्फ दैहिक पूर्ति ही सब कुछ लगती है या कहा जाता है और उन्हें अपनी काम ईच्छा तृप्त करने के लिए होने की संज्ञा दी जाती है.. परन्तु सत्य ये है की एक लडका जब प्रेम मे होता है और ये किसी स्त्री विशेष हेतु नही है..परिवार मे माता पिता या कोई भी हो सकता है जिसे वो प्रेम करता है तो एक सत्य तो ये है की वो कोई भी छोटी से छोटी चीज या घटना नही भूलता है चाहे फिर वो आपके अधरो के किनोरे पर लगी लाली हो या फिर आपकी वो निश्चल मुस्कराहट ❤ आपका बालो को सँवारना हो या चेहरे और नैनो पर आती बालो की लटो को हटाकर कान के पीछे लगा देना हो या आपका हाथ थामकर चलना हो या आपके कंगन की वो आवाज जो उसे कही ना कहीं अन्दर से झकझोर देती है और चाहे फिर वो आपके पायल की ध्वनि जिसको सुनकर वो आभास कर लेता है आपने निकट आ जाने का और जब कोई इस स्तर तक प्रेम मे हो तो आपकी खूशबू भी आपकी उपस्थिति का प्रमाण होती है.. उस लडके को जिसने कभी खुद से जिम्मे...

साथ और प्रेम ❣️

साथ और प्रेम ❤ अक्सर सुना है मैंने की भाव मे होकर व्यक्ति अपनी भावनाओं और वास्तविक प्रेम से कहीं दूर चला जाता है और उसी मनोस्थिति को वह प्रेम का नाम दे देता है जो की एक स्वभाविक सी प्रक्रिया है और सहज भी परन्तु क्या ईतना ही सरल होता है ये प्रेम.. मै चाहे जितना प्रयास करूँ सीधे शब्दो मे इसे परिभाषित करने का परन्तु ये संभव नही है क्यूँकि प्रेम किसी के लिए साथ रहना और किसी के लिए प्रेमी या प्रेमिका के चेहरे को देख लेना भर और सभी ने अपने अपने मानक तय किए हुए है प्रेम के और इसकी परिभाषा के..❤ परन्तु मै जिस प्रेम को लिख और महसूस कर सकता हूँ या जिस स्वरूप को मै मानता हूँ या मेरी जैसी विचारधारा वाले व्यक्ति होते है उनके लिए समर्पण आवश्यक होता है रिश्ते या प्रेम मे जो की प्रारंभ मे प्रचुर मात्रा मे होता है मगर जीवन की विषम परिस्थतियों के थपेडो से वह छिन्न भिन्न होता दिखता है.. मेरी सोच और शब्द सिर्फ ईतना कह और महक सकते है की प्रेम वही है जिसमे ना किसी को पाने की लालसा और ना किसी को सिर्फ स्वंय तक सीमित रखने की भावना हो..मै एक सामान्य सी सोच का लडका हूँ परन्तु जब महसूस करना हो तो मै महामानव भी ह...

मैं और प्रेम 🖤

मै और प्रेम ❤ ये जो मै लिखा है वो अंहकारवश नही बल्कि सत्य की वजह से लिखा गया है क्यूँकि मै और मेरी तरह के हर लडके की एक बहुत बडी दुविधा होती है जीवन मे..शायद हम उनमे से है जिनके लिए प्रेम सिर्फ समय व्यतीत करना किसी के साथ या रहना ही उद्देश्य नही होता है हम लोग वो है जो हर बात हर जज्बात और हर वस्तु या घटना को ज्यादा महसूस करते है गहराई से और फिर चाहे वो प्रेम हो या घर पर माता पिता की ग़ैरमौजूदगी मे आने वाली जिम्मेदारी हो या फिर किसी लडकी से किया गया प्रेम हो या फिर आने वाले जीवनसाथी की कल्पना हो..❤ सभी कुछ असीमित महसूस करते है और हर वस्तु या घटना को लेकर ईतनी गहराई और संजीदगी से सोचते या देखते है परन्तु सत्य ये भी है की हम जैसै लडको के अस्तित्व को ये संसार नकार चुका है बहुत पहले ही और हमे बेवकूफ और काफी अनर्गल नामो की संज्ञा दी जाती है और बहुत कुछ बोला और सुनाया जाता है यार दोस्तो के मध्य और समाज के मध्य और ना जाने कितने अनगिनत अवसरो पर.. परन्तु जिस स्तर पर हम प्रेम और प्रगाढ संबधो की समझ रखते है उससे दो ही बाते होती है की या तो हमे असंवेदनशील कहा जाता है या फिर नकारात्मक रूप से हमे रिश...

“तुम अब किसी और की हो”

तुम किसी और की हो अब ❣️ जिस जगह हमेशा मैं खुद को सोचता था , वहां अब कोई और तुम्हारे साथ नज़र आता है। तुम्हारे नाम के साथ  अब किसी और का नाम जुड़ गया है। तुम अब किसी और की पहचान हो। सपने साथ भले ही हमने देखे थे, लेकिन हकीकत कोई और है आज, बंधन जो हमने जोड़ा था साथ, पर तुम्हारे साथ संबंध अब किसी और का है। तुम्हारे मन के किसी कोने में भले मैं हूं.. लेकिन तुम्हारे तन पर किसी और का अधिकार है। तुम्हारे सपनों में भले ही मेरा आना जाना हो, पर सुबह आंख खुलते ही तुम्हारे तुम्हारे दीदार का हक किसी और का है। सपने भले ही हमने सजाए थे, पर तुम्हारे साथ तस्वीर में खड़े होने का हक़ किसी और का है। मन पर भले किसी का भी अधिकार हो, स्वामित्व उसी का होता है, जिस रिश्ते को समाज स्वीकृति देता है।। हाय ये मेरा दर्द