संदेश

बेनाम रिश्ता

  कब और कौन किसको कितना अच्छा लगने लगे इसका कोई निश्चित सिद्धांत नही कहा जा सकता, कभी किसी की बोली बाणी अच्छी लग जाती है, तो कभी किसी का व्यवहार, तो कभी किसी का रुप और किसी का गुण अच्छा लग जाता है, और इन्सान उससे प्यार करने लगता है। पर अक्सर कभी-कभी कोई ऐसा भी होता है , जब अकारण ही कोई अच्छा लगने लगता है ....जी चाहता है उससे बोला बतियाया जाये, अपना दुख दर्द कहा सुना जाये हंसा हंसाया जाये। भले ये जानते हुये कि इससे हंसना बोलना बतियाना समाज को अच्छा न लगेगा, और यह रिश्ता बहुत दूर तक नही जायेगा फिर भी मन उसी के आर्कषण में बंधा रहता है। और जितनी देर का भी संग साथ होता है इंसान उसे उस व्यक्ति के साथ भरपूर जी लेना चाहता है।   ऐसा भी नही कि आप उससे मुहब्ब्त कर बैठे हों    मगर ये भी है कि वो मुहब्बत से कम नही होती हां इस मुहब्बत में वासना नही होती कुछ पाने की अभिलाषा नही होती।  इस रिश्ते को कोई नाम नही होता। अक्सर ये रिश्ता तो बस जंगल के फूल की तरह खिलता है महकता और मुरझा जाता है। जिसे न कोई खाद देता है न पानी देता है न सिंचाई करता हे न गुडाई करता है न जिसके खिलने पे जम...

हाल-ए-दिल

  रह   रह   कर   ना   तुम्हारे   ये   सवाल   मेरे   कानों   में   अब   भी   गूंज   पड़ते   हैं  , " क्या   होगा   तुम्हारा ..  मेरे   ना   होने   के   बाद ...???  हालाँकि   मैच्यूरेटी   जैसा   थोडा   कुछ   तो   तुम   मुझे   सिखाके   गई   ।। कभी   कोई   कपड़े   खरीदना   हो   तो , तुम्हें   मैसेज   कर   के   पूछना  “ बताओ   जरा   कौन   सी   अच्छी   है "  कभी   मूड   खराब   हो   तो , तुम्हें मैसेज   कर   के   बोलना “ सुनो   ना   एक   बात   बतानी   है ’’  कभी   तबियत   खराब   होती ..  तुम्हें   मैसेज   कर   के   बोलते .. “  बहुत   तेज सरदर्द   हो   रहा   और   फिर   तुम्हारा   मुझसे   भी   ज़्य...

अनकही बातें

  ऐसा   है   ना   कि   तुमसे   मिलने   को   तुमको   देखने   को   दिल   तो   करता   है   तो   लेकिन   क्या   है   ना   की   ये   बीच   में   मेरी   मोहब्बत   आ जाती   है   जो   मानो   या   मानो   आज   भी   ख़त्म   होने   का   नाम   नहीं   ले   रही   है …. यक़ीन   मानो   इस   मिडिल   में   भी   मिडिल   क्लास   के   लड़के   से   बेहतर   प्यार     आज   भी   तुमको   कोई   नहीं   कर   सकता  , तुम   सिर्फ़  तुम   नहीं   हो   मेरे   लिए   पूरी   दुनिया   थी , तुम्हारी   बातों   के   आगे   मैं   ना   चाहते   हुए   ख़ुद   को   रोक   नहीं   पाता   था   हालाँकि   रोक   तो...

तुम्हारी यादें

कुछ यादें मोती जैसी होती है, बिल्कुल सफेद मिलावटहीन, और उन यादों को बहुत ही संजोकर रखना होता है, ताकि उसकी सादगी, सुंदरता और शुद्धता सदैव वैसी ही रहे,कोई और रंग उसमें घुल ना पाये.. तुम्हारी सारी यादों को आज भी मैंने कोरा रखा है, किसी और रंग की मिलावट नहीं होने दी उसमें कभी, ये तुम्हारी यादों के सफेद मोती हमें हमेशा एक माला में पिरो कर रखते हैं। तुम्हारे पास ना होने पर भी मैंने तुम्हारी जगह सिर्फ़ तुम्हारी यादों को दीं।

"एक वक्त था”

  एक   वक़्त   था ! जब   मेरी   ख़्वाहिशों    की   कतार   बहुत   लंबी   थी ! जब   मुझे   तुम   भी   चाहिए   थी   और   तुमसे   जुड़े   हर   एक   हक़   भी ! एक   वक़्त   था ! जब   मैं   हर   रोज   सपनों   में   जिया   करता   था ! जब   मेरी   हर   सुबह   तुमसे   होती   थी , और   शाम   तुमपे   ख़त्म ! एक   वक़्त   था , मैं   बदतमीज़   था   काफी , मुझे   समझ   नहीं   थी   हर   उस   चीज़   की   जो   मेरे   पास   थी ! तुम   भी   थे   उसमें   से   एक ! तुम्हारा   होना   जैसे   मेरे   लिए   एक   आदत   सी   थी ! जैसे   जीवन   के   लिए   साँस , गीत   को   आवाज़ , दिन   को   रात , तुम   कुछ   ऐसे   ही ...