संदेश

“मेरे राम का जन्मदिन”

#जन्मदिवस विशेष मेरे राम आपके सामने आपके गुणों की प्रशंसा करना सूर्य के सामने प्रकाश दिखाने जैसा है,फिर भी जब से आपको जाना है मोहब्बत हो गयी है आपसे या यूं कहूँ की जिंदगी बन गए हो आप पता है..जब आपको एकटक मेरी नजरे निहारती रहती है आपको तो लगता है कि बस अभी आप मुझे आके गले लगा लोगे ,जब भी आपको देखते हुए आपसे अपने दुख,सुख या कोई बताता हूँ तो अपने दिल को एक अलग सुकून मिलता है हाँ कभी कभी आँखों में आँसू भले आ जाते हैं पर ये आपसे मिलने की खुशी में गिर जाते हैं... जिंदगी की इन तमाम ख्वाहिशों में एक भी है आपके गए उन अभी जगहों पर जाना है जहां आपने जीवन व्यतीत किया था माना ख़्वाब थोड़े मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं है पूरी उम्मीद है कि मेरे और ख्वाबों को आप पूरा करो या ना करो लेकिन इस ख्वाब को जरूर पूरा करेंगे... जैसा कि हम सबको पता है कि आज रामनवमी है इस दिन त्रेतायुग में आर्यावर्त के महान सम्राट महाराज दशरथ जी के यहां जेष्ठ पुत्र के रूप में प्रभु श्री राम जी का जन्म हुआ था। वैसे तो राम इस मृत्यु लोक में एक सामान्य मनुष्य की भांति जन्मे थे परंतु उन्होंने अपने कर्मों के द्वारा स्वयं को मर्यादा पु...

“मैं लिख नहीं पाता”

मै लिख नहीं पाता❤ कभी सोचती हो कि किस तकलीफ से मुझे शब्दों का चुनाव करना पडता है जब मै एक तुम्हारे लिए लिखने बैठता हूँ..समझ नही पाता की कहाँ से लिखू..कितना लिखूं और क्या क्या लिखूं आखिर... तुम्हारे झुमके का जिक्र करूँ जो मुझे बरबस अपनी ओर खींचता था या उन आँखो का जिक्र करूँ जो मुझे देखकर बस देखती रह जाती थी..उन बालो की लटो का जिक्र जो आँखो पर आती थी या उन पलको का जिन पर ख्वाब थे बहुत से..❤ जिक्र उस खूशबू का जो तुम्हारी मौजूदगी बताती थी..या जिक्र तुम्हारी उस हरे रंग की टी शर्ट और काले रंग वाली शार्ट स्कर्ट का जो मुझे यूँ बेचैन करने लगता था या फिर आँखो मे लगे काजल का..?आखिर ऐसा क्यूँ है की जितना लिखता हूँ..कम ही लगता है..❤️ शब्दो मे वो सामर्थ्य क्यूँ नही जो बता सके की क्या महसूस करता था जब करीब आती थी तुम..जिक्र तुम्हारे शरीर की उस गुलाब जल जैसी खूशबू का ..या जिक्र तुम्हारी उस मादक मुस्कुराहट का..आखिर कहाँ तक..कब तक और कितना..बहुत तकलीफ होती है जब शब्द नही मिलते..❤ जिनसे ये बता सकूँ की आखिर तुम क्या हो मेरे लिए..ऐसा क्यूँ है आखिर?  ये सवाल अक्सर रह जाता है मेरे जहन मे..कौनसा कोना है आ...

“कल्पनाएं और तुम”

जीवन में एक समय उपरांत बातें महत्व नहीं रखती कदाचित मौन अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है महत्वपूर्ण हो जाता है आंखों से आंखों की बात होना महत्वपूर्ण हो जाता है हांथों का हांथों से स्पर्श महत्वपूर्ण हो जाता है तुम्हारे साथ किसी वाहन पर चुपचाप रात भर सड़कें नापना। बातों की आयु अधिक नहीं होती बातों से बातों में होने वाला प्रेम अधिक नहीं जीता प्रेम का परिपक्व होना ही उसका मौन सुनिश्चित करता है, इस क्षण जब रात अपनी मृत्यु की ओर शांति से बढ़ रही है हेडफोन पर किसी एक ही गाने को अनगिनत बार लगातर सुनते हुए मुझे तुम दिखती हो, मुझे दिखता है की कैसे हम दोनों तुम्हारी पसन्द की होंडा सिटी में बैठकर पूर्णिमा की रात भर इस गीत को सुनते हुए तुम्हारी मनपसंद गलियों तुम्हारी मनचाही सड़कों को पार कर रहे हैं। पर यह सब स्वप्न हैं मेरे बचकाने स्वप्न चुपचाप खुली आंखों से देखे स्वप्न, मैं सदैव सोचता हूं की खुली आंखों से देखे स्वप्न हम परिपूर्ण कर सकते हैं हम प्रयास कर सकते हैं उन स्वप्नों की नकल करने का यद्यपि अभी मेरा स्वयं से होंडा सिटी लेना शेष है अभी शेष है मेरा तुमसे मिलना अभी शेष है हमारा आंखों आंखों में बात करना अ...

“मेरा लिखना तुम्हारा पढ़ना”

तुम्हारा ❤ मेरे लिखे शब्दो को एक तेरा इस कदर गौर से पढना..हर बार मुझे मेरे ही लिखे शब्दों मे अपनी बात कहकर नयापन लाना..हर बार निखर कर मेरे सामने मेरी ही कल्पना को साकार कर देना..❤ ईतना ठहराव..ईतनी गहनता..और तुम्हारे प्रेम की अद्वितीय प्रगाढता मुझे बोझिल होने से रोकती तुम्हारी ये बाते..कितना सुखद अनुभव है जब मेरे लिखे शब्दों को मायने तेरी बातो से होते है.. सिर्फ पढना तो हर क्षण हर किसी से महसूस किया है मैनै..मगर एक तेरा बिना कुछ बोले मुझे समझा देना..मेरी ही हर कृति को मुझसे बेहतर समझना..मेरी हर पीडा और प्रेम को यूँ विभाजित कर उसमे से सिर्फ पीडायुक्त प्रेम को चुनना..❤ विरह..प्रेम..और उस हर ऐहसास को मुझसे बाँटना..जो कभी हमने साथ मे जिया..महसूस किया..बस तुम पढो और मै लिखता रहूँ..और बस तुम्हारा और सिर्फ तुम्हारा होकर रहूँ..❤ काश..कुछ ऐसा हो..❤ इतवार और तुम्हारा ख्याल ❤

दास्ताँ

किसी लड़की के प्यार में टूटा हुआ लड़का .., जब तिल तिल जल रहा होता है उसकी सारी यादों को,उन सारे तोहफ़ों को जो कभी उसकी मोहब्बत की कहानी बयान करते थे , उसके सारे फोटोज को चुन चुन कर डिलीट करना ,फिर वो एक एक कर उन ख़तों को भी जलाने लगता है जिनको बार बार पढ़कर उसकी मोहब्बत जवान हुयी थी ..,उस आख़िरी ख़त को जलाते वक़्त उसके हाथ काँप जाते हैं ..। आख़िर ये उसके प्यार का पहला ख़त जो था । फिर अनायास ही उस ख़त को एक बार फिर से पढ़कर उसका प्रेम फिर से फूट पड़ता है ..। और उस ख़त को सीने से लगाए वो तब तक रोता है जब तक उसकी आँखों से पानी की एक एक बूँद तक नहीं सूख जाती । वो फिर उठता है और उस ख़त को सहेज कर रख देता है एक किताब के पन्नों के बीच .., और लिखने बैठ जाता है अपने प्यार की कुछ दास्तान इस तरह , एक बार फिर से ईश्क़  हारते हारते जीत जाता है ..। ❤️❤️❤️ इन सब के बीच कभी कभी रोते हुए कब नींद आ जाती है पता ही ना चलता है, आँख खुलने पर कहानी थोड़ी अधूरी सी लगती है लेकिन अब किस्मत की लकीरों को बदला नहीं जा सकता है और फिर जो हो रहा है होने दो  उनकी खुशी की खातिर कौन सी पहली रात जाग रहे हैं....😄...

तुम्हारी यादें

याद केवल याद रह जाती है, जिंदगी तो चलती ही जाती है, तुम नही हो तो भी मेरे पास हो, हर लम्हे मे मेरे साथ हो, इरादा जो तय किया था साथ तुम्हारे, करने हैं पूरे वो काम हमारे। तुम होते तो ख़्वाहिशें जिंदा रहतीं, तुम नही हो तो ख्वाब जिंदा हैं, मेरे होने मे तुम्हारा साथ कितना है, ये मुझसे बेहतर जानता कौन है, तुमसे ज्यादा मुझे पहचानता कौन है, अब सब अधूरा है न कुछ अच्छा है न बुरा है, जीवन मे अकेले बढते जाना है,  जो इरादे तुम्हारे साथ तय किए थे, उसे पूरा करते जाना है बस बढते जाना है।  साभार -अनुज श्रीवास्तव

"ज़िन्दगी की कहानी"

तुम्हारा यूँ मेरे साथ “ कनक भवन ” का परिक्रमा करना.. एक दूसरे का हाथ थाम कर जिंदगी जीना “ लाल साहब दरबार ” में यूं दोनों का सामने बैठकर एक दूसरे को देखना वो हनुमान गढ़ी के सीढ़ियों पर साथ साथ चढ़ना.. वो दोनों का साथ में मंदिरों में जाना.. अयोध्या की गलियों में जिंदगी के सबसे बेहतरीन लम्हें बिताना.. दुआओं में तुमको मांगना...  बजरंग बली से तुम्हारे लिए तुम्हारी खुशी चाहना... बाइक पर बैठकर यूँ मुझे कसकर पकड़ कर मेरे साथ स्टेशन से घर तक आना.. ऐसी तमाम यादों रोज रातों में आंखों के सामने ऐसी गुजरती है जैसे कि कल की बातें हो, नींद तुमको आ जाती होगी लेकिन मैं अब कभी कभी दवाओं का भी सहारा ले लेता हूँ... ऐसा नहीं है कि मैं डिप्रेशन या स्ट्रेस जैसे मामलों में पड़ चुका हूँ बस तुम्हारी आदत पड़ चुकी थी ना इसी लिया ऐसा होता होगा बाकी तुम्हे लगता है कि तुम्हारे लिए मेरी फीलिंग्स बदल गयी तो तुम्हारे और मुझमें फर्क ही क्या रह जायेगा...।। वो आखिरी मुलाकात की कुछ बातें अगर तुमको याद हो तो तब भी मेरी फीलिंग्स तुम्हारे साथ थी...हाँ मुझे लगता था कि ये सब गलत है लेकिन वो क्या है ना कि गलत सही ही देखा जाए तो फिर...