"किसी की दुल्हन"
“वो अब किसी और की दुल्हन थी…”
शाम ढल रही थी।
फोन की स्क्रीन पर उसका नाम चमका — वही नाम, जिसे मैंने कभी अपनी पूरी दुनिया कहा था।
पर आज उसके नाम के आगे एक नया रिश्ता जुड़ चुका था… किसी और का नाम।
मैंने कॉल नहीं उठाई।
क्योंकि अब उसकी आवाज़ सुनना भी गुनाह सा लगता था।
वो लड़की, जो कभी मेरे हर ख्वाब का हिस्सा थी,
आज किसी और के सपनों की ज़िम्मेदारी बन चुकी थी।
मैं उसे आज भी उतना ही चाहता था,
पर अब चाहना सिर्फ़ दिल में रखने की चीज़ रह गई थी।
कभी-कभी उसकी यादें इतनी तेज़ आती हैं
कि लगता है वह यहीं कहीं पास खड़ी है…
मुस्कुरा रही है,
और कह रही है — “अब हमें भूल जाना चाहिए।”
लेकिन कैसे भूलूँ उसे,
जिससे मैंने ज़िंदगी की हर दुआ माँगी थी?
वो किसी और की पत्नी बन गई,
और मैं… उसकी यादों का पति।
रातों को उसके बिना सोना सीख लिया है,
पर उसके बिना जीना अभी भी नहीं आया।
कुछ रिश्ते काग़ज़ पर खत्म हो जाते हैं,
लेकिन दिल में ताउम्र चलते रहते हैं
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